CM Nitish Kumar transfers ₹2,500 crore to 25 lakh women.बिहार में महिला सशक्तिकरण की नई पहल.

मुख्यमंत्री द्वारा 2,500 करोड़ रुपये का हस्तांतरण:-हाल ही में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” के अंतर्गत 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में सीधे 2,500 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की। यह पहल राज्य में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है।

यह कार्यक्रम राजधानी पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग से आयोजित किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और लाभार्थी महिलाएँ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ीं। इस अवसर पर राज्य सरकार ने यह भी बताया कि अब तक इस योजना के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं को कुल 18,100 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

CM Nitish Kumar transfers ₹2,500 crore to 25 lakh women

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना किसी भी समाज के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसी सोच के साथ बिहार सरकार ने अगस्त 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को प्रारंभिक पूंजी देकर उसे स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि:

  • परिवार की आय बढ़ सके
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो
  • महिलाओं की सामाजिक भागीदारी मजबूत हो
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले

योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये दिए जाते हैं, जबकि व्यवसाय सफल होने पर अतिरिक्त सहायता के रूप में 2 लाख रुपये तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

अब तक की उपलब्धियाँ

राज्य सरकार के अनुसार:

  • 1.81 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिल चुका है
  • कुल 18,100 करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में भेजे गए
  • 1.44 करोड़ लाभार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से हैं
  • लगभग 12 लाख महिलाएँ शहरी क्षेत्रों की हैं

यह आँकड़े बताते हैं कि योजना का प्रभाव राज्य के दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचा है और बड़ी संख्या में महिलाएँ इससे जुड़ रही हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा शुभारंभ

इस योजना का औपचारिक शुभारंभ सितंबर 2025 में नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया था। उस समय 75 लाख महिलाओं के खातों में 7,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

यह पहल उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जाती है जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकारें महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय पर विशेष जोर दे रही हैं।

महिलाओं के जीवन में बदलाव

योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देती है।

उदाहरण के तौर पर:

  • कुछ महिलाओं ने डेयरी व्यवसाय शुरू किया
  • कई ने सिलाई-कढ़ाई केंद्र खोले
  • कुछ ने छोटी दुकानें या घरेलू उद्योग शुरू किए

मुज़फ्फरपुर की एक लाभार्थी महिला ने प्राप्त राशि से गाय खरीदकर दूध का व्यवसाय शुरू किया और अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। वहीं नालंदा की एक महिला सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी कर रही हैं, जिससे अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना का असर अधिक दिखाई दे रहा है क्योंकि:

  • कम पूंजी में छोटे व्यवसाय संभव हैं
  • परिवार आधारित कार्य संस्कृति पहले से मौजूद है
  • स्थानीय बाजार उपलब्ध है
  • महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है

इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ रही है बल्कि गाँवों में सूक्ष्म-उद्यमिता (micro-entrepreneurship) को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम

महिला रोजगार योजना केवल आर्थिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। इसके प्रमुख सामाजिक प्रभाव:

  • महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ना
  • निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि
  • परिवार और समाज में सम्मान बढ़ना
  • बालिका शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच

जब महिलाएँ कमाने लगती हैं तो परिवार की प्राथमिकताएँ भी बदलती हैं—शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर अधिक खर्च होता है।

भविष्य की संभावनाएँ

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि:

  • शेष परिवारों को भी जल्द पहली किस्त मिलेगी
  • सफल उद्यमियों को 2 लाख रुपये तक अतिरिक्त सहायता दी जाएगी
  • प्रशिक्षण और विपणन सहायता भी बढ़ाई जा सकती है

यदि यह योजना प्रभावी रूप से जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार महिला उद्यमिता के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बन सकता है।

चुनौतियाँ भी मौजूद

हालाँकि योजना सराहनीय है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं:

  • व्यवसाय प्रबंधन का अनुभव न होना
  • बाजार तक पहुँच की कमी
  • प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव
  • वित्तीय साक्षरता की कमी

इन समस्याओं के समाधान के लिए कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों की मजबूती और डिजिटल भुगतान जागरूकता आवश्यक होगी।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभर रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।

यदि सरकार प्रशिक्षण, बाजार और वित्तीय मार्गदर्शन जैसी सहायक व्यवस्थाओं को और मजबूत करती है, तो यह योजना न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलेगी बल्कि पूरे राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना को नई दिशा दे सकती है।

इस प्रकार, 2,500 करोड़ रुपये का हालिया हस्तांतरण केवल एक वित्तीय लेन-देन नहीं, बल्कि बिहार की महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया सशक्त कदम है।

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