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Bangladesh oath ceremony highlights: Tarique Rahman sworn in as new Prime Minister of Bangladesh:बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: तारिक रहमान का शपथ ग्रहण, नई राजनीति की शुरुआत

Tarique Rahman sworn in as new Prime Minister of

Tarique Rahman sworn in as new Prime Minister of:17 फरवरी 2026 का दिन दक्षिण एशिया की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया, जब तारिक रहमान ने आधिकारिक रूप से बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। आम चुनावों में शानदार जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह राजधानी ढाका स्थित संसद परिसर में आयोजित किया गया, जिसने देश की राजनीतिक दिशा को नए सिरे से परिभाषित करने का संकेत दिया।

यह सत्ता परिवर्तन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, संविधान सुधार और क्षेत्रीय कूटनीति पर गहरा प्रभाव डालने वाला कदम माना जा रहा है। आइए इस पूरे घटनाक्रम, इसके राजनीतिक महत्व और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझते हैं।

Tarique Rahman sworn in as new Prime Minister of :चुनावी जीत से प्रधानमंत्री पद तक का सफर

तारिक रहमान लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वे प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख नेता माने जाते हैं। हालिया आम चुनावों में उनकी पार्टी को निर्णायक जनादेश मिला, जिसके बाद उन्हें संसदीय दल का नेता चुना गया और प्रधानमंत्री पद के लिए रास्ता साफ हुआ।

यह जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

जनता ने आर्थिक चुनौतियों, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और शासन में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर बदलाव की उम्मीद के साथ वोट दिया।

शपथ ग्रहण समारोह: परंपरा से अलग फैसला

तारिक रहमान को राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने शपथ दिलाई। यह समारोह पारंपरिक राष्ट्रपति भवन की जगह संसद के दक्षिण प्लाजा में आयोजित किया गया, जो राजनीतिक संकेतों से भरा निर्णय माना जा रहा है।

शपथ स्थल से जुड़े दो महत्वपूर्ण स्थान:

स्थान परिवर्तन को कई विश्लेषक “जनता की संसद को प्राथमिकता” देने के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं।

सांसदों की शपथ और संवैधानिक सुधार विवाद

नए सांसदों को शपथ मुख्य चुनाव आयुक्त ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने दिलाई। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विवाद भी सामने आया।

BNP सांसदों ने “संविधान सुधार आयोग” के सदस्य के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि:

दूसरी ओर कुछ दल, विशेषकर जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, इस प्रक्रिया के समर्थन में दिखाई दिए।

यह मुद्दा आने वाले महीनों में बांग्लादेश की राजनीति का केंद्र बन सकता है।

180 दिनों का संविधान सुधार एजेंडा

जनमत संग्रह में बहुमत मिलने के बाद प्रस्ताव रखा गया कि पूरी संसद 180 दिनों तक संविधान सुधार आयोग के रूप में कार्य करेगी। इस प्रस्ताव के संभावित प्रभाव:

हालांकि राजनीतिक असहमति के कारण यह प्रक्रिया आसान नहीं दिखती।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नजर

शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति ने कूटनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया।

भारतीय राजनीति की प्रमुख नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत बनाना जरूरी है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों के प्रमुख आयाम:

नई सरकार के साथ इन मुद्दों पर नई बातचीत की उम्मीद है।

क्षेत्रीय राजनीति और पाकिस्तान फैक्टर

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की राजनीति में पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को लेकर भारत में चिंता देखी जा रही है। हालांकि नई सरकार ने अभी तक संतुलित विदेश नीति का संकेत दिया है।

संभावित रणनीति:

यह संतुलन दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

तारिक रहमान के सामने प्रमुख चुनौतियां

प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:

1. आर्थिक सुधार

2. लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती

3. राजनीतिक स्थिरता

जनता की उम्मीदें

बांग्लादेश की जनता नई सरकार से निम्नलिखित अपेक्षाएं रखती है:

यदि सरकार इन मोर्चों पर सफल रहती है, तो यह बदलाव ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

दक्षिण एशिया पर संभावित प्रभाव

तारिक रहमान का सत्ता में आना केवल राष्ट्रीय घटना नहीं है। इसके क्षेत्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं:

इसलिए दुनिया की नजरें ढाका पर टिकी हुई हैं।

भविष्य की राह

नई सरकार की शुरुआती नीतियां तय करेंगी कि:

पहले 100 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

निष्कर्ष

तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना बांग्लादेश के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय की शुरुआत है। चुनावी जीत, परंपरा से अलग शपथ समारोह, संविधान सुधार की बहस और क्षेत्रीय कूटनीति—इन सभी ने मिलकर इस राजनीतिक परिवर्तन को असाधारण बना दिया है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है और दक्षिण एशिया की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।

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